गाय-भैंस के अलावा अब ऊंटनी के दूध को भी खाद्य सुरक्षा के दायरे में ले लिया गया है। तय मानक के अनुरूप ऊंट पालक देश में कहीं भी दूध की बिक्री कर सकेंगे। लेकिन इस पर अब चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की भी नजर रहेगी। सीएमएचओ डा. अजय चौधरी ने बताया कि भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने ऊंटनी के दूध का मानक निर्धारित कर इसे तत्काल प्रभाव से पूरे देश में प्रभावी करने के आदेश दिए हैं। इन मानकों पर आधारित ऊंटनी के दूध का पूरे देश में क्रय-विक्रय किया जा सकेगा। दूध में तीन प्रतिशत फैट होने चाहिए।
पशु चिकित्सक डा. निरंजन चिरानिया ने बताया कि टीबी, सुगर, अस्थमा व कमजोरी के उपचार में यह उपयोगी साबित हो रहा है। बीकानेर मेडिकल कॉलेज में इसका उपयोग किया जा रहा है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में काफी कारगर साबित होता है। अब आइसक्रीम बनाने के काम में भी लिया जा रहा है। ऊंट पालक चाय में भी उपयोग करने लगे हैं। इसमें कैल्सियम की मात्रा अधिक होती हैं।
गांव-गांव कलेक्शन की सुविधा शुरू हो तो मिले फायदा
वहीं ऊंट पालक रामकिशन व मघाराम का कहना है कि ऊंटनी के दूध का कलेक्शन करने के लिए गांव-गांव सुविधा शुरू होनी चाहिए। इसके बाद ही ऊंट पालकों को इसका फायदा मिलेगा। चंूकि ऊंटनी का दूध जल्दी खराब हो जाता है। पशु पालन विभाग के संयुक्त निदेशक डा. राजेन्द्र तमोली ने बताया कि पशु गणना 2012 के अनुसार जिले में करीब 41276 ऊंट हैं। गांव-गांव सुविधा शुरू होती है तो ऊंट पालकों को इसका फायदा जरूर मिलेगा।
